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क्या सचमुच ईवीएम में छेड़छाड़ सम्भव है ?

December 3, 2017 3:27 pm by: Category: आपका मत Leave a comment A+ / A-

जरा गौर कीजिये अगर किसी भी ईवीएम में छेड़खानी करके चुनाव जीता जा सकता, तो फिर कभी बीजेपी की सरकार कही नही बनती, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी न बनते। 2014 में पीएम मोदी के लिये प्रधानमंत्री बनना सपना हो जाता। 10 सालों से काबिज कांग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 2014 में फिर से पीएम होते।

सबसे अधिक बार देश पर शासन कांग्रेस पार्टी ने किया है। सबसे अधिक शासन चलाने का अनुभव भी इनके पास है और आज भी कांग्रेसी विचार धारा के सैकड़ों आईएएस मोदी सरकार में कार्य कर रहे हैं। अगर ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती तो पिछली सरकारे क्या दूध की धुली सरकारे थीं। जिन पर हजारों करोड़ के घोटालों के आरोप लगे थे और सही भी पाए गए। जिनके कई नेता आज भी जेलों में हैं। अगर ईवीएम में छेड़छाड़ सम्भव होती तो क्या पिछली सरकारे ईवीएम में छेड़छाड़ करवा कर चुनाव में नही जीत सकती थी। आज अगर बीजेपी कोई भी चुनाव जीतती है तो उस पर सीधे आरोप लगता है कि ईवीएम ने जिताया उसमे गड़बड़ है।

देश प्रदेश की पिछली सरकारे कांग्रेस, सपा, बसपा कई वर्षों से जीत रहे थे। तो इनको कौन जीता रहा था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लगातार दो बार चुनाव जीते, उस समय भी ईवीएम से ही वोट डाले गए थे। उत्तरप्रदेश में भी चुनाव ईवीएम से ही हुआ और 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। उसके बाद 2012 में उत्तरप्रदेश में अखिलेश यादव जी मुख्यमंत्री बने वो भी पूर्ण बहुमत से तब भी ईवीएम से चुनाव हुआ था। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी लम्बे समय से वहाँ मुख्यमंत्री है। चुनाव जीत रही हैं। वहाँ भी चुनाव ईवीएम से ही हो रहा है। बिहार, पंजाब, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु इन राज्यों के विधानसभा के चुनाव में भी मत ईवीएम से डाले गए। दिल्ली में आम आदमी पार्टी जीती। इन राज्यों में बीजेपी की सरकार नही बनी। ये राज्य भी बड़े राज्य हैं। अगर ईवीएम में छेड़छाड़ सम्भव होती तो फिर बीजेपी यहाँ सत्ता में काबिज न होती।

साढ़े तीन साल से बीजेपी की सरकार केंद्र में है और 9 महीने से उत्तरप्रदेश में भाजपा की सरकार है। जनता उनके कार्यो को पसंद कर रही हैं और इसी वजह से उनको हर चुनाव में ज्यादातर जगह विजय प्राप्त हो रही है। जनता उनके कार्यो और नीतियों को पसंद कर रही। है। उत्तर प्रदेश में योगी की नीतियों को पसंद किया गया। जिसके फलस्वरूप बीजेपी नगर निकायों में बम्पर विजयी हुई। यदि ईवीएम में छेड़छाड़ सम्भव होती तो एक सबसे बड़ा उदाहरण आपको बताते हैं। मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने कई चुनाव वहाँ जीते। जबकि केंद्र में सरकार कांग्रेस की रही और गुजरात में मोदी चुनाव जीतते रहे। कांग्रेसी सरकार ने मोदी जी को हर प्रकार से घेरने की कोशिश की लेकिन वो मोदी जी का कुछ न कर पाई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मोदी जी को चुनाव में हराने के लिये उस समय केंद्र में काबिज सत्ता धारी दल ईवीएम में छेड़छाड़ नही करवा सकता था। अगर उसके लिये ये सम्भव होता वो ऐसा ही करती। लेकिन ईवीएम में छेड़छाड़ सम्भव नही। ईवीएम में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नही की सकती। ये बात चुनाव आयोग पहले ही सिद्ध कर चुका है। भारत देश का चुनाव आयोग पारदर्शिता से चुनाव करवाता है। तभी देश मे अच्छे राज नेता चुनकर आ रहे है। देश के चुनाव आयोग पर आरोप वो लोग लगा रहे हैं। जिन्होंने अपनी सरकारों के रहते भ्र्ष्टाचार किया और जनता का शोषण किया। समाज का जातिवाद के नाम पर आपस में बंटवारा करवाया और विकास के नाम देश प्रदेश को लूटा। आज वही नकारे और भ्रष्टाचारी लोग चुनाव हार रहे हैं, तो ईवीएम पर छेड़छाड़ का मिथ्या आरोप लगा रहे है।

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