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प्रकृति के सफाई कर्मी गिद्ध को संरक्षित करना होगा

August 6, 2017 1:23 pm by: Category: आपका मत, क्षेत्रीय, प्रमुख समाचार, राष्ट्रीय, समाचार Leave a comment A+ / A-

हमें अपने आसपास के परिवेश, वायु और पर्यावरण को साफ, स्वच्छ और स्वस्थ्य बनाये रखना है तो प्रकृति के सफाई कर्मी गिद्ध को संरक्षित करना होगा, इसे बचाना होगा, डायक्लोफिनेक दवा के उपयोग को बंद करना होगा, गिद्धों की प्रजाति को बढ़ाने में सहयोग करना होगा, तभी हम सच्चे मन और आत्मा से प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान में सहभागी बन सकेंगे।
प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को हम तभी कारगर साबित कर सकेंगे जब हम गिद्धों के संरक्षण में अपना सहयोग देंगे और इनके जीवन के लिये डाइक्लोफिनेक दवा का उपयोग जानवरों पर बंद कर देंगे।

प्रकृति की सफाई का माहिर सफाई कर्मी गिद्ध, इसके बिना स्वच्छ भारत का सपना संभव नहीं है, गिद्ध मृत पशुओं के शवों को खाकर आपके आसपास के क्षेत्र का साफ रखता ही है पर्यावरण की सफाई करता है, जानवरों के संक्रमित मृत शरीरों का भक्षण कर इनसे उत्पन्न होने वाले खतरनाक रोगों से मनुष्य की रक्षा करता है। जानवरों पर डायक्लोफिनेक दवा के उपयोग से आज गिद्ध विलुप्तता की कगार पर है, भारत में मात्र 1 प्रतिशत ही गिद्ध रह गये हैं। इनके बचाव के लिये भारत सरकार ने डाइक्लोफिनेक नामक दवा का उपयोग पशु इलाज में पूर्ण: प्रतिबंधित कर दिया है। डाइक्लोफिनेक का पशुओं के लिये प्रयोग ना करके गिद्धों का संरक्षण करना हमारा मौलिक कत्र्तव्य है।

गिद्धों को सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्ताओं के लिये भी जाना जाता है, माना जाता है जटायु नामक गिद्ध ने रावण से सीता माता की रक्षा करते हुये अपने प्राण त्याग दिये थे, पारसी धर्म में भी गिद्धों का बहुत महत्व है।

जिले में गिद्धों के संरक्षण हेतु बीएनएचएस की टीम द्वारा कार्य किया जा रहा है। गिद्ध आज से 25 वर्ष पूर्व तक बड़ी संख्या में थे, लेकिन वर्ष 1990 से अब तक गिद्धों की प्रजाति की संख्या में लगभग 99 प्रतिशत की कमी आई है। गिद्ध प्रजाति पशु इलाज में प्रयोग की जाने वाली डायक्लोफिनेक नाम दवा के कारण आज विलुप्ती की कगार पर पहुंच गई है। डाइक्लोफिनेक मवेशियों को दर्द निवारण दवा के रूप में दी जाती है, यदि मवेशी की डाइक्लोफिनेक से उपचार किये जाने के तीन दिनों के अंदर मृत्यु हो जाती है तो उसके शव में यह दवाई रह जाती है, यह दवा गिद्धों के लिये जहरीली होती है तथा यह दवा गिद्धों के गुर्दे खराब कर मृत्यु का कारण बनती है।

  • गणेश अग्रवाल
प्रकृति के सफाई कर्मी गिद्ध को संरक्षित करना होगा Reviewed by on . हमें अपने आसपास के परिवेश, वायु और पर्यावरण को साफ, स्वच्छ और स्वस्थ्य बनाये रखना है तो प्रकृति के सफाई कर्मी गिद्ध को संरक्षित करना होगा, इसे बचाना होगा, डायक् हमें अपने आसपास के परिवेश, वायु और पर्यावरण को साफ, स्वच्छ और स्वस्थ्य बनाये रखना है तो प्रकृति के सफाई कर्मी गिद्ध को संरक्षित करना होगा, इसे बचाना होगा, डायक् Rating: 0

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