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15 बैंकों पर जुर्माने को रद्द का आदेश

July 17, 2017 9:42 am by: Category: कारोबार, राष्ट्रीय, समाचार Leave a comment A+ / A-

एक ट्राइब्यूनल ने 15 बैंकों पर फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) की ओर से लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया है। एफआईयू ने वह जुर्माना कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करने के मामले में लगाया था। कथित मनी लॉन्ड्रिंग में मदद का दावा डिजिटल मैगजीन कोबरापोस्ट ने चार साल पहले किया था। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत काम करने वाले अपीलेट ट्राइब्यूनल ने 88 पेज के अपने आदेश में जुर्मानों को खारिज कर दिया। उसने कहा कि एफआईयू बैंकों के खिलाफ आरोपों की जांच करने में विफल रही और वह केवल इलेक्ट्रॉनिक सबूत पर भरोसा करती रही, जो स्वीकार्य नहीं था।

ट्राइब्यूनल ने अपने ऑर्डर में कहा, ‘यह साफ है कि डायरेक्टर (एफआईयू) ने अब रद्द किए गए उस आदेश को जारी करने से पहले एडिटेड टेपों और ट्रांसक्रिप्ट्स से अलग कोई जांच नहीं की। एफआईयू को अब तक पूरे और अनएडिटेड टेप्स नहीं मिले हैं। लिहाजा यह साफ है कि प्रतिवादी इलेक्ट्रॉनिक सबूत के आधार पर मामला साबित करने में विफल रहा। ऑनलाइन अपलोड की गईं ट्रांसक्रिप्ट्स स्वीकार्य नहीं हैं और कानून के तहत अधिकृत नहीं हैं।’ ट्राइब्यूनल ने कहा कि ट्रांसक्रिप्ट्स और वीडियो के वर्जन एडिटेड थे और उन्हें असल बातचीत का ठोस सबूत नहीं माना जा सकता है।

कोबरापोस्ट ने कुछ बैंक एग्जिक्युटिव्स की बातचीत रिकॉर्ड की थी, जिसमें कथित तौर पर वे अनअकाउंटेड रकम को वैध बनाने का ऑफर दे रहे थे। मार्च 2013 में उसने आरोप लगाया था कि बैंक अपने सिस्टम के तहत और जानबूझकर इनकम टैक्स ऐक्ट, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट सहित कई कानूनों और नो योर कस्टमर नॉर्म्स का उल्लंघन कर रहे हैं ताकि बड़ी मात्रा में डिपॉजिट हासिल किए जाएं और मुनाफा बढ़ाया जाए।

इसके बाद एफआईयू ने बैंकों को संदिग्ध ट्रांजैक्शंस की जानकारी न देने का दोषी करार दिया था और 15 बैंकों पर जुर्माना लगाया था। उसने एचडीएफसी बैंक पर 26 लाख रुपये, आईसीआईसीआई बैंक पर 14 लाख रुपये, एसबीआई पर 5 लाख रुपये और एक्सिस बैंक पर 13 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। बैंकों ने अपीलेट ट्राइब्यूनल में इन जुर्मानों को चुनौती दी थी। ट्राइब्यूनल ने हालांकि इन कथित संदिग्ध ट्रांजैक्शंस की जानकारी न देने के लिए बैंकों को फटकार लगाई और कहा कि भविष्य में उन्हें और उनके कर्मचारियों को सावधान रहना चाहिए और ऐसी बातचीत की रिपोर्ट देनी चाहिए। ऐसी घटनाओं की जानकारी देने के लिए बैंकों के पास जरूरी डिटेल्स नहीं होने के मामले पर ट्राइब्यूनल ने कहा, ‘इसी घटना की जानकारी स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने दी थी, लिहाजा यह बात नहीं मानी जा सकती है कि दूसरे बैंकों के पास रिपोर्ट करने लायक पर्याप्त जानकारी नहीं थी।’

बैंकों ने कहा कि मीडिया रिकॉर्डिंग्स जांच की प्रकृति की थीं और डीलिंग्स को संदिग्ध ट्रांजैक्शंस की कैटिगरी में नहीं रखा जा सकता है। डेलॉयट की एक फरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया था कि उपलब्ध विडियो फुटेज और ट्रांसक्रिप्ट्स से न तो पूरी बातचीत का पता चलता है और न ही घटनाक्रम का पूरा रिकॉर्ड मिलता है और हो सकता है कि गुमराह करने वाली पिक्चर दिखाने के लिए इनमें एडिटिंग की गई हो।

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