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तरक्की से जोड़ें अपने सोच विचार को

July 5, 2017 10:12 am by: Category: नई राहें, यूथ कॉर्नर Leave a comment A+ / A-

जब बुरा सोचने लगते हैं तो सब बुरा ही दिखने लगता है। आगे बढ़ने और हालात में सुधार करने की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। खुद को एक राय में बांध लेना, अपनी संभावनाओं को सीमित कर लेना है।

जब हम मान लेते हैं कि हमारी क्षमताएं, हुनर व बुद्धिमता सब जन्म से जुड़ी हुई हैं, तो हमारा दिमाग उसी तरह व्यवहार करने लगता है। हमारा दिमाग दूसरी ओर झांकने में खुद को असमर्थ पाता है। वहीं जब हम अपनी इस सोच में थोड़ा बदलाव करते हैं और समझते हैं कि हमारा ज्ञान और क्षमताएं, सब एक समय के बाद बदलती हैं तो हम आगे के बारे में सोचने लगते हैं। जब दिमाग में पूर्वाग्रह होते हैं तो वह कहता है कि मुझ में ऐसा कोई हुनर नहीं, जिससे मैं आगे बढ़कर कुछ करूं। मैं कही भी अच्छे से फिट नहीं हो सकता। इस तरह की सीमित सोच के कारण हम अपने भविष्य को भी सीमित कर लेते हैं। वहीं इसके उलट खुद को लगातार प्रेरित करते रहने से हम जिंदगी में कई बेहतर मौके पाते हैं और उन्हें अच्छी तरह निभा भी पाते हैं। पूर्वाग्रह एक मनोवैज्ञानिक लक्षण है। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी की प्रोफेसर कैरोल ड्वेक ने पहली बार इसे समझाया। उनके मुताबिक पूर्वाग्रह कई स्तर पर हमें प्रभावित करते हैं,

खो ना जाएं प्रेरणाएं
कुछ आदतें बचपन में ही तैयार हो जाती हैं। एक तय मानसिकता के चलते पेरेंट्स एक खास तरह से व्यवहार करते हैं। बच्चों के प्रयासों के बजाय वे उनके हुनर को तवज्जो देते हैं। मसलन, तुम टेनिस खेल के लिए ही बने हो। या फिर तुम तो जन्म से ही इंजीनियर हो। इसका सीधा असर बच्चे के दिलो-दिमाग पर पड़ता है। वह मानकर चलता है कि उसकी जिंदगी उसी प्रतिभा पर टिकी है। उसके प्रयास का कोई मोल नहीं है। इस कारण वह खुद पर संदेह करता है। खुद को कमतर मानने लगता है। इससे उनका नजरिया कुछ ऐसा हो जाता है कि वे दिखावा अधिक करने लगते हैं। वह जताने लगते हैं कि वे कितने स्मार्ट हैं और उन्होंने कैसे कम प्रयास में इतना सब पा लिया। जब भी कोई बच्चा कुछ प्रयास करे, हमें उसे सराहना चाहिए। ऐसा नहीं कहना चाहिए कि आखिर इससे क्या मिला? सराहेंगे तो बच्चे को लगातार अच्छा करने की प्रेरणा मिलती रहेगी।

कार्यक्षेत्र में आपका व्यवहार
पूर्वाग्रहों से ग्रस्त व्यक्ति मानकर चलते हैं कि लीडरशिप जैसा गुण आपके भीतर जन्मजात ही होता है। इससे वे कुछ सीखने और प्रयास करने के अनेक मौकों से हमेशा वंचित रहते हैं। इससे न सिर्फ वे खुद का नुकसान करते हैं, बल्कि टीम के साथियों के साथ भी उनका ऐसा ही व्यवहार रहता है। इसके उलट लगातार आगे बढ़ने वाली मानसिकता के लोग जिंदगी को निरंतर सीखने वाली यात्रा मानकर चलते हैं। वे लगातार सीखने की भूख को जगाए रखते हैं। ऐसे लोग अपनी टीम के लिए काफी मददगार होते हैं।

रिश्तों के समीकरण
किसी भी संबंध में जल्द राय बनाने की आदत भारी असर डालती है। हम कई बार दूसरों को जरूरत से ज्यादा ही परखने लगते हैं। मसलन वह बहुत आलसी है, गैर-जिम्मेदार है, लापरवाह है आदि। न सिर्फ हम मन में ऐसी धारणा बनाते हैं, बल्कि बातचीत में भी अपने इन विचारों को दूसरों पर थोपने में कसर नहीं छोड़ते। वहीं जब हम आगे बढ़ते रहने की सोच से प्रेरित होते हैं, तो मानते हैं कि सब का अपना-अपना तरीका होता है। इसका मतलब यह हरगिज नहीं कि वह सही नहीं है। और यह भी हो सकता है कि हम सामने वाले के बारे में सही ही सोच रहे हों, मगर बेहतर सोच वाले लोग किसी व्यक्ति के बारे में किसी एक ही धारणा को अंतिम निर्णय नहीं मान लेते। जो जैसा है, उसे अपनी जिंदगी जीने दें और आप अपनी जिंदगी जिएं। हमें अपने ज्ञान और स्किल्स पर भरोसा करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। वरना हम हमेशा खुद में व दूसरों में कमियां तलाशते रह जाएंगे।

खुद की सीमाओं को बढ़ाएं
हमें अपनी योग्यताओं, क्षमताओं और कौशल को किसी दायरे में बांधने से बचना होगा। ऐसा तब होगा, जब हम अपनी कमजोरियों पर ही नहीं, बल्कि उनसे उबरने के रास्तों पर भी विचार करें। हम सोचते रह जाते हैं कि हममें ऐसी कौन सी खूबियां हैं, जो इन कमजोरियों को दूर करने में कारगर हैं? पर, जैसा कि मारियानने विलियम्सन ने कहा है कि आप किसी भी विधा के महारथी बनें, पर सबसे पहले आपको कुछ भी नए तरीके से सोचने का हुनर सीखना होगा।
याद रखें कि चीजें हर वक्त बदलती रहती हैं। हमारी सोच में भी हर स्तर पर लगातार बदलाव होता रहता है। हमें अपने दिमाग के सिग्नल को सुनना चाहिए। इससे नए विकल्प तलाशने में मदद मिलती है। हम दूसरों के बारे में और खुद के लिए राय बनाने से बचते हैं। और हां, हमें खुद को हमेशा नई चीजें सीखने के लिए हरदम तैयार रखना चाहिए।

तरक्की से जोड़ें अपने सोच विचार को Reviewed by on . जब बुरा सोचने लगते हैं तो सब बुरा ही दिखने लगता है। आगे बढ़ने और हालात में सुधार करने की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। खुद को एक राय में बांध लेना, अपनी संभावनाओं को स जब बुरा सोचने लगते हैं तो सब बुरा ही दिखने लगता है। आगे बढ़ने और हालात में सुधार करने की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। खुद को एक राय में बांध लेना, अपनी संभावनाओं को स Rating: 0

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